अमृतसर: सरकार ने शहर की घेराबंदी कर किसानों-मजदूरों पर किया लाठीचार्ज; तीन किसान घायल, सड़क पर मोर्चा शुरू
22/03/2026, अमृतसर: पंजाब की भगवंत मान सरकार द्वारा राज्य की जनता पर दमन चक्र लगातार जारी है। आज ‘किसान मजदूर मोर्चा’ चैप्टर पंजाब के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत अपनी मांगों को लेकर डीसी कार्यालय अमृतसर की ओर बढ़ रहे किसानों, मजदूरों और महिलाओं पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं। प्रशासन ने पूरे शहर को चारों तरफ से टिप्पर और कँटीली तारें लगाकर सील कर दिया ताकि प्रदर्शनकारियों को रोका जा सके। इस अवसर पर किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि जिस तरह भगवंत मान सरकार शांतिपूर्ण धरने पर इस कदर तशद्दुद (जुल्म) पर उतर आई है, उससे एक बार फिर साबित हो गया है कि इस सरकार का चरित्र पूरी तरह लोकतंत्र विरोधी है। उन्होंने बताया कि पुलिस लाठीचार्ज में तीन किसान घायल हुए हैं, जिनमें बघेल सिंह भिट्टेविड को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि अवतार बावा और सुखजिंदर सिंह भी घायल हुए हैं। उन्हों ने कहा कि शंभू-खनौरी मोर्चे के दौरान ट्रालियों और अन्य सामान की चोरी व तोड़फोड़ से हुए 3 करोड़ 77 लाख रुपये के नुकसान का मुआवजा दिया जाए, शहीद व घायल परिवारों की विभिन्न आंदोलनों के शहीदों और घायलों के परिवारों को बकाया मुआवजा और सरकारी नौकरियां तुरंत दी जाएं, एमएसपी गारंटी कानून और किसानों-मजदूरों की पूर्ण कर्ज मुक्ति सहित सभी लंबित मांगों पर पंजाब सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करें, बिजली संशोधन बिल 2025, बीज एक्ट 2025 और विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ के खिलाफ पंजाब सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित करे और केंद्र को भेजे, स्मार्ट मीटर या प्रीपेड मीटर जबरदस्ती लगाना तुरंत बंद किया जाए, पराली प्रदूषण के नाम पर किसानों पर की गई ‘रेड एंट्री’, जुर्माना और पुलिस केस वापस लिए जाएं, गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई की आड़ में आम युवाओं और उनके उन रिश्तेदारों को प्रताड़ित करना बंद किया जाए जिनका अपराध से कोई लेना-देना नहीं है, नशे की दलदल में फंसे युवाओं का मुफ्त इलाज करवाकर उन्हें रोजगार दिया जाए और नशे की सप्लाई करने वाले राजनीतिक नेताओं पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने ने जानकारी दी कि पुलिस ने ओंकार सिंह भंगाला, दिलबाग सिंह गिल और बीबी नरिंदर कौर पलाह साहब सहित करीब 35 किसानों – मजदूरों को हिरासत में लिया है। उच्चाधिकारियों के साथ बातचीत में उन्हें छोड़ने पर सहमति तो बनी, लेकिन रात 8 बजे तक उनकी रिहाई नहीं की गई थी। गोल्डन गेट के सामने गुरध्यान सिंह भटेड़ी और जर्मनजीत सिंह बंडाला के नेतृत्व में आ रहे जत्थे को रोके जाने के कारण पूरा दिन सड़क पर धरना चलता रहा। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर सड़कें ब्लॉक की ताकि आम जनता के बीच आंदोलनकारियों को बदनाम किया जा सके, लेकिन किसान नेताओं द्वारा विरोध के बाद रास्ते खुलवाए गए। इस दौरान जसविंदर सिंह लोंगोवाल, रंजीत सिंह कलेर, बाज़ सिंह सारंगड़ा, सकत्तर सिंह कोटला, लखविंदर सिंह डाला, गुरदेव सिंह गगोमाहल, कुलजीत सिंह काले सहित बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और महिलाएं शामिल हुईं।



