धर्म एसीएन
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ की गई। सुबह से ही शहर के मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जय माता दी के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माँ कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी। इसी कारण भक्त इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। कई स्थानों पर लंगर और प्रसाद वितरण भी किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महिलाओं और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा कर माँ को फूल, धूप, दीप और विशेष रूप से मालपुए और मीठे पकवानों का भोग अर्पित किया। व्रत रखकर भक्तों ने पूरे दिन माँ की भक्ति में समय बिताया।
माँ कूष्मांडा का महत्व
- अष्टभुजा धारी देवी
- सिंह पर सवार
- सृष्टि की रचयिता (आदिशक्ति)
- सूर्य के समान तेजस्वी स्वरूप
- विशेष भोग: मालपुआ
- मंत्र: ॐ देवी कूष्मांडायै नमः



