नई दिल्ली। देश में श्रम कानूनों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए नए लेबर कोड 1 अप्रैल 2026 से लागू किए जाने की तैयारी है। इन नए नियमों के लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर, काम के घंटे, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे।
सरकार ने पहले के 29 श्रम कानूनों को मिलाकर चार नए लेबर कोड बनाए हैं, जिनमें वेज कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड शामिल हैं। इनका मकसद श्रम कानूनों को सरल बनाना और कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा देना है।
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव
नए लेबर कोड के तहत कर्मचारियों की बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 फीसदी करना जरूरी होगा। इससे पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि बढ़ेगी, लेकिन कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है।
काम के घंटे और ओवरटाइम नियम
नए नियमों के अनुसार सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम तय किया गया है। इससे अधिक काम कराने पर कंपनियों को कर्मचारियों को दोगुना वेतन देना होगा। हालांकि, कंपनियां 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी जैसे विकल्प भी अपना सकती हैं।
ग्रेच्युटी नियमों में राहत
फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को अब 5 साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक साल की सेवा पूरी होने पर भी उन्हें ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा।
नौकरी छोड़ने पर जल्दी भुगतान
नए लेबर कोड के तहत नौकरी छोड़ने या निकाले जाने की स्थिति में 48 घंटे के भीतर फुल एंड फाइनल सेटलमेंट करना होगा।
हर कर्मचारी को मिलेगा अपॉइंटमेंट लेटर
अब हर कर्मचारी को लिखित नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।
गिग वर्कर्स को भी मिलेगा फायदा
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे फूड डिलीवरी और ऐप आधारित काम करने वाले गिग वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा।
महिलाओं के लिए नए प्रावधान
महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी, लेकिन कंपनियों को उनकी सुरक्षा और परिवहन की जिम्मेदारी उठानी होगी।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इन नए लेबर कोड का मकसद श्रम कानूनों को आसान बनाना, व्यापार को बढ़ावा देना और कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
निष्कर्ष
नया लेबर कोड देश के श्रम ढांचे में बड़ा बदलाव लेकर आएगा। इससे जहां कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा और भविष्य के लिए ज्यादा लाभ मिलेगा, वहीं कंपनियों को भी नए नियमों के अनुसार अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा।



