spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

इतिहास का ख़ूनी पन्ना: जलियांवाला बाग हत्याकांड

इतिहास का ख़ूनी पन्ना: जलियांवाला बाग हत्याकांड
जलियांवाला बाग हत्याकांड भारतीय इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसने अंग्रेज़ी हुकूमत की क्रूरता को दुनिया के सामने उजागर कर दिया। यह घटना 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर में घटित हुई, जब हजारों निहत्थे भारतीय एकत्र होकर शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे।
जलियांवाला बाग का इतिहास
जलियांवाला बाग, स्वर्ण मंदिर के निकट स्थित एक खुला मैदान था, जो पहले किसी बाग जैसा नहीं बल्कि एक खाली, ऊबड़-खाबड़ ज़मीन थी। यह जगह पहले सरदार हिम्मत सिंह जलेवाला के अधिकार में थी, जिन्हें यह जमीन महाराजा रणजीत सिंह के समय इनाम में मिली थी। समय के साथ यह स्थान वीरान हो गया और कूड़ा-करकट डालने की जगह बन गया।
13 अप्रैल 1919: वह काला दिन
बैसाखी के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग अमृतसर पहुंचे थे। इसी दिन शाम को जलियांवाला बाग में अंग्रेज़ों के दमनकारी कानूनों के खिलाफ एक सभा आयोजित की गई।
उस समय पंजाब में मार्शल लॉ लागू था और जनसभाओं पर प्रतिबंध था। फिर भी हजारों लोग इस सभा में शामिल हुए।
तभी ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर अपनी फौज के साथ वहां पहुंचा। बिना किसी चेतावनी के उसने निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।
गोलियों की बौछार और भयावह दृश्य
करीब 10 मिनट तक लगातार फायरिंग हुई, जिसमें लगभग 1650 गोलियां चलाई गईं।
लोगों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था—संकरी गलियां, ऊंची दीवारें और चारों ओर सैनिक।
कई लोग भागते हुए मारे गए
दर्जनों लोग जान बचाने के लिए कुएं में कूद गए
पूरा मैदान लाशों से भर गया
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गए, जबकि कई स्वतंत्र स्रोतों के अनुसार यह संख्या 1000 से भी अधिक थी।
देश में आक्रोश और स्वतंत्रता संग्राम पर प्रभाव
इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
महात्मा गांधी ने अंग्रेज़ों के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया और यह घटना स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक मोड़ बन गई।
उधम सिंह का बदला
इस नरसंहार का बदला 21 साल बाद लिया गया।
ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में जाकर पंजाब के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ’डायर की गोली मारकर हत्या कर दी, जिसे इस घटना का जिम्मेदार माना जाता था।
स्मारक और आज का जलियांवाला बाग
बाद में इस स्थान को खरीदकर यहां शहीदों की याद में एक स्मारक बनाया गया। आज जलियांवाला बाग एक राष्ट्रीय तीर्थ बन चुका है, जहां देश-विदेश से लोग श्रद्धांजलि देने आते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles