वॉशिंगटन/तेहरान
मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने जंग की आशंकाओं को तेज कर दिया है। हालिया घटनाक्रमों के बाद दोनों देशों ने सख्त रुख अपनाया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं। अमेरिका ने अपने युद्धपोत और अतिरिक्त सैनिक तैनात करने के संकेत दिए हैं, जबकि ईरान ने भी किसी भी हमले का “करारा जवाब” देने की चेतावनी दी है।
मध्य पूर्व में बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति काबू में नहीं आई तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। खासतौर पर खाड़ी क्षेत्र में तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
दुनिया भर की नजरें हालात पर
संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
आर्थिक असर की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जंग छिड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत जैसे आयातक देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य तैयारी ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। दुनिया की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति हालात को संभाल पाएगी या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।



